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80G12ABसमिति पंजीकरण 2708

हमारे बारे में / इतिहास एवं संस्थापक

2014 में लगाया गया एक बाग़

गुलिस्तान-ए-मेहदी का उद्घाटन लखनऊ में मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014 को इसके संस्थापक मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी की पहल पर हुआ। पहले ही दिन चौदह यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया।

हम कौन हैं

गुलिस्तान-ए-मेहदी में आपका स्वागत है

शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, 14 अक्टूबर 2014
शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, 14 अक्टूबर 2014और तस्वीरें

गुलिस्तान-ए-मेहदी यतीमख़ाने की स्थापना 14 अक्टूबर 2014 को हुई, जिसमें 14 यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया। कमेटी का मुख्य मक़सद हर बच्चे को आधुनिक और दीनी तालीम के साथ-साथ किसी पेशेवर या व्यावसायिक हुनर में महारत दिलाकर अपने पैरों पर खड़ा होने के क़ाबिल बनाना है। इस समय छात्रों में से एक सरकारी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में B.Tech कर रहा है, और बाक़ी छात्र लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। उन्हें खाना, रहने की जगह, कपड़े, इलाज और पढ़ाई की सामग्री जैसी सभी सुविधाएँ मुफ़्त दी जाती हैं। कुछ बच्चों के न पिता हैं, न माता और न ही कोई क़रीबी रिश्तेदार।

हमारे संस्थापक

इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी की याद में

उन्होंने बहुत कम माँगा और बहुत ज़्यादा दिया। नर्म दिल और प्यारी मुस्कान वाले एक ख़ूबसूरत और शरीफ़ इंसान, वे सबके लिए हौसले का ज़रिया थे। वे अपनी बात के पक्के थे, जो सुनते थे और जो कहते थे उसे पूरा करके दिखाते थे। वे सादा जीवन और उच्च विचार में यक़ीन रखते थे। उनके काम, उनका प्यार और उनकी फ़िक्र — सिर्फ़ अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उस समाज के लिए भी जिसमें वे रहते थे — हमेशा याद रखे जाएँगे। वे एक बेहतरीन बेटे थे जिन्होंने अपने माँ-बाप का बहुत ख़याल रखा, एक प्यार करने वाले शौहर और अपने बच्चों के हीरो थे। वे खुले दिमाग़ के, तरक़्क़ीपसंद और उसूलों वाले इंसान थे। उनका मानना था कि तालीम ही तरक़्क़ी का एकमात्र ज़रिया है, और उनके बच्चे और नाती-पोते फ़ख़्र के साथ उनके नक़्शे-क़दम पर चलते हैं।

उन्होंने अपनी ज़िंदगी ग़रीबों और यतीमों की भलाई में लगा दी। ज़रूरतमंदों की मदद करना और उनकी ज़रूरतें पूरी करना, इसे वे निःस्वार्थ भाव से अपना धर्म मानते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने यतीम बच्चों की परवरिश और सहारे के लिए यतीमख़ाना गुलिस्तान-ए-मेहदी की बुनियाद रखी, जिसकी देखभाल अब उनके बेटे मीसम अब्बास करते हैं। इन्हीं वजहों से आज भी उन्हें पहचाना और याद किया जाता है। उनकी कमी सबको हमेशा महसूस होती रहेगी।

अहम पड़ाव

अब तक का हमारा सफ़र

  1. 2014

    उद्घाटन

    मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014 को लखनऊ के मौलाना निसार अहमद साहब द्वारा उद्घाटन। संस्थापक: इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी। चौदह यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया।

  2. 2015

    सोसाइटी का पंजीकरण

    सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (उत्तर प्रदेश) के तहत 9 मार्च 2015 को पंजीकरण संख्या 2708 के रूप में पंजीकृत, जिसका पंजीकृत कार्यालय वंडर लैंड ग्रीन-II, करबला के पास, अमराई गाँव, लखनऊ 226028 में है।

  3. 2025

    पंजीकरण का नवीनीकरण

    सोसाइटी रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 9 मार्च 2025 से पाँच वर्षों के लिए नवीनीकृत (नवीनीकरण संख्या R/LUC/09928/2025-2026)।

  4. आज

    बड़े होते बच्चे

    यहाँ रहने वाले बच्चों में से एक सरकारी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में B.Tech कर रहा है; बाक़ी बच्चे लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। संस्थापक के सबसे बड़े बेटे मीसम अब्बास अध्यक्ष के रूप में सोसाइटी का नेतृत्व कर रहे हैं।